क्या आपका दिमाग 'Glitch' कर रहा है? भाषा और तर्क का गहरा संबंध।
हम अक्सर सोचते हैं कि हम दुनिया को अपनी आँखों से देखते हैं, लेकिन विज्ञान कहता है कि हम दुनिया को अपनी "भाषा" (Language) से देखते हैं। जिस चीज के लिए आपके पास शब्द नहीं है, उस चीज का विचार आपके दिमाग में पैदा ही नहीं हो सकता।
आज भारत में हम एक अजीब विरोधाभास देख रहे हैं। एक तरफ टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, लेकिन दूसरी तरफ हमारी तर्कशक्ति (Logic) और मौलिक सोच (Original Thinking) कम हो रही है। इसका कारण शिक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि भाषा का गिरता स्तर है।
एक तरफ गहरा ज्ञान, दूसरी तरफ डिजिटल शोर। हम क्या चुन रहे हैं?
1. भाषा: आपके दिमाग का ऑपरेटिंग सिस्टम (Language is the OS)
अगर हम मानव मस्तिष्क को एक 'सुपरकंप्यूटर' मान लें, तो भाषा उसका 'ऑपरेटिंग सिस्टम' (OS) है। जैसे कंप्यूटर में अगर कोड (Code) गलत लिखा जाए, तो सॉफ्टवेयर रन नहीं करेगा, वैसे ही अगर व्याकरण (Grammar) और शब्दावली (Vocabulary) कमजोर हो, तो तर्क (Logic) का निर्माण नहीं हो सकता।
एक डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए सिर्फ फॉर्मूले रटना काफी नहीं है। 'Trigonometry' या 'Biology' जैसे शब्दों के मूल अर्थ (Root Meaning) को समझना जरूरी है। जब तक आप शब्द को नहीं समझते, आप सिर्फ डेटा प्रोसेस कर रहे हैं, विचार नहीं बना रहे।
गलत व्याकरण का मतलब है गलत तर्क। नीव कमजोर तो इमारत कमजोर।
2. रटना vs. समझना: एक राष्ट्रीय समस्या
आज हम छात्रों को "रटना" सिखा रहे हैं ताकि वे नौकरी पा सकें। रटने वाला व्यक्ति एक बेहतरीन 'कर्मचारी' (Worker) बन सकता है जो दिए गए निर्देशों का पालन करे। लेकिन वह कभी 'आविष्कारक' (Innovator) नहीं बन सकता।
नवाचार (Innovation) के लिए 'क्यों' और 'कैसे' का जवाब चाहिए होता है, और यह जवाब भाषा की गहराई में छिपा है। जो छात्र यह नहीं जानता कि गणित के चिन्ह क्यों बने, वह केवल कैलकुलेटर है, गणितज्ञ नहीं।
रटना आपको 'फॉलोअर' बनाता है, समझना आपको 'लीडर' बनाता है।
3. अभद्र भाषा: शब्दावली की गरीबी (The Poverty of Vocabulary)
सोशल मीडिया पर आज गाली-गलौज (Abuse) और फूहड़ शब्दों (Slang) की बाढ़ है। बहुत से युवा इसे "Cool" और "Strong" होना मानते हैं।
लेकिन मनोवैज्ञानिक सच यह है: गाली देना ताकत नहीं, कमजोरी है।
जब किसी व्यक्ति के पास अपनी भावनाओं—क्रोध, हताशा, या असहमति—को व्यक्त करने के लिए सटीक और तार्किक शब्द नहीं होते, तो उसका दिमाग 'शॉर्टकट' लेता है और गाली का सहारा लेता है। जितनी आपकी शब्दावली (Vocabulary) छोटी होगी, उतनी ही छोटी आपकी दुनिया होगी।
जब शब्द कम पड़ जाते हैं, तो अभिव्यक्ति का दम घुटने लगता है।
निष्कर्ष: समाधान क्या है? (The VIONN Vision)
अगर हमें भारत को एक 'सशक्त राष्ट्र' बनाना है, तो हमें भाषा की शुद्धता (Purity of Language) की ओर लौटना होगा। इसका मतलब यह नहीं कि हम पुरानी तरह बात करें, बल्कि इसका मतलब है कि हम शब्दों का सही और तार्किक प्रयोग करें।
- नए शब्द सीखें।
- सिर्फ पढ़ें नहीं, शब्दों को महसूस करें।
- शोर (Noise) से दूर रहें और संकेत (Signal) को पहचानें।
जब भाषा शुद्ध होगी, तो तर्क शुद्ध होगा। और जब तर्क शुद्ध होगा, तो राष्ट्र अजेय होगा।
शुद्ध भाषा = शुद्ध तर्क = भविष्य का भारत।
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Written by Sukhdev Dahiya - Follow on Instagram
Curated for VIONN - The Signal in the Noise.
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